भयानक जंगलों की खतरनाक कहानिया जिसे पढ़कर आप के रोंगटे खड़े हो जायेंगे

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मै दुर्गेश प्रताप सिंह (तन्हा)अपनी 27 साल की जिन्दगी में  खोये लोगो को ढूंढ़ने का मेरा बत रिकार्ड रहा है. ज्यादातर लोग या तो अपने राे से भटक जाते ह या फिर किसी पहाड़ी से फिसल  कर रास्ता भूल जाते है और वापस  नहीं जा पाते. जैसा की पुरानी कहावत है की – अगर खो जाओ तो जहाँ हो वहीँ रहो – इसिलए ज्यादातर लोग जो जंगलो और पहाड़ो पर खो जाते ह वो वही आस पास ही मिल जाते है और कहीं दूर नहीं जाते. लेकिन दो बार मेरे पास ऐसे केस आये जहाँ ऐसा नहीं था . इन दोनों ही केस ने मुझको अंदर तक हिला  के रख दिया था. और इी केस ने मुझे आगे मोटीवेशन दी की मै  पूरी विश्वास के साथ खोये हुए लोगो को ढूँढू जिन लोगो को ढूंढ़ने का मुझे जिम्मेदारी दिया गया है.
पहला केस था एक छोटे से लड़के का जो अपने माँ बाप के साथ जंगल में पिकनिक  मनाने गया था. वो और उसकी छोटी बहन दोनों एक ही साथ खोये थे. दोनों माँ बाप के साथ ही खेल रही थे, की माँ बाप की नजर सिर्फ  कुछ सेकंड  के लिए ही उनसे हटी और दोनों बेटे अचानक गायब हो गए. माँ बाप के काफी ढूंढ़ने पर भी जब बे नहीं मिले तब उन्होंने हम को फ़ोन किया. मै अपनी टीम के साथ उस जगह पर पहुंचा जहाँ से बे गायब हुए थे. थोड़ा सा ढूंढ़ने पर भी तो बेटी मिल गयी. पर वो छोटा लड़का नहीं मिला . जब से हमने उसके भाई के बारे में  पूछा तो उसने बताया की भैया को “भालू अंकल” ले कर गए ह. उसने बताया की “भालू अंकल” ने उसको खाने के लिए बेर दिए  और उसको किसी को कुछ न बताने के लिए  बोला. “वो बस भैया के साथ थोड़ी देर खेलना चाहता था”, बेटी ने बताया. आखरी बार बेटी  ने अपने भाई को देखा था तब वो “भालू अंकल” के कंधो पर बैठा था और खुश था. हमारा सबसे पहला शक गया की शायद ये किडनैपिंग  का केस है. और बेटी  को किसी ने बहला फुसला के किडनैप कर लिया है. लेकिन उस एरिया में भी हम किसी दूसरे आदमी के वहां आने का कोई सुराग नहीं मिला. लड़की बार बार यही बता रही थी की वो “भालू अंकल” दिखने में बिलकुल अलग था, उसका कद छोटा था और उसके शरीर पर बाल थे, जैसे की भालू के होते है , और उसका चेहरा अजीब सा था. हमने उस इलाके को कई हफ्ते तक छाना लेकन बेटी का कोई सुराग नहीं मिला. वो मेरी लाइफ के सबसे रोमांचक केस में से एक था. आखिर में  हार कर हमें  वो केस बंद ही करना पड़ा  जहाँ तक की खोये ए लोगो का सवाल है, तो आप मान सकते हो की मेरे पास आने वाले लगभग आधे cases खोये ए लोगो क़े ही आ करते थे. बाकी आधे cases फं से ए लोगो को िनकालने क़े होते थे. जैसे की कोई पहाड़ी चढ़ते ए िगर गया और चोट लग गयी, या िफर िकसी जंगली जानवर ने काट िलया हो, या िफर सांप या मधुमयों ने डांक मार िदये हो, या िफर िकसी ने अपने आप को जला िलया हो. आप यकीन नहीं मानगे ऐसा िकतनी बार होता था की कोई अपने आप को ही जला ले वो भी गलती से. ऐसा करने वाले ादातर जवान लड़के ही आ करते थे जो शराब के नशे म ऐसा कर बैठते थे.
हमारी छोटी सी टीम आ करती थी 7 -8 लोगो की. और हमारी टीम म ादातर लोग बत पुराने और experienced थे जो अपने काम को बखूबी समझते थे और करते थे. ादातर cases म हम खोये ए शस का कोई न कोई सुराग िमल ही जाता था. लेिकन कु छ के स ऐसे भी होते थे जहाँ हम कोई सुराग ही नहीं िमल पाता की खोया आ शस आखर कहाँ गायब आ, ऐसे के सेस मुझे सबसे ादा पेचीदा लगते थे ुकी कोई सुराग ही नहीं िमलता था. ऐसा ही एक के स मुझे याद है िजसने मुझे बत परेशान िकया, ुकी उस के स म हम सुराग भी िमल गया था, लेिकन िफर भी हम कु छ नहीं कर पाए ुकी उस सुराग ने के स सुलझाने क़े बजाये और कई सवाल खड़े कर िदये थे. आ यूँ की एक आदमी िजसकी उ करीब 65 साल थी, वो पहाड़ पर चढ़ने (hiking ) क़े िलए गया था. उसकी wife ने हमको कॉल िकया कु छ िदन बाद उसके वािपस ना आने की रपोट िलखवाने क़े िलए. दरअसल उस आदमी को दौरे आने की बीमारी थी और वो िबना छड़ी के चल भी नहीं पाता था. उसकी वाइफ को लगा की शायद वो अपने दवाई लेना भूल गया है और बीच म उसको कहीं दौरा पड़ गया है. इससे पहले की आप पूछे, म आपको बता दू की मुझे नहीं पता की वो आदमी अके ले ही ों गया पहाड़ पर जबिक उसको पता था की उसको ये बीमारी है, या िफर उसकी वाइफ उसके साथ ों नहीं गयी. म इस तरह के सवाल नहीं पूछा करता था ुकी एक point क़े बाद इन सवालो का कोई मतलब नहीं रह जाता था. कोई साथ गया या नहीं गया, उससे मुझे ा मतलब, मेरा काम खोये ए को ढूंढ़ने का था, और म उसी पर फोकस करना चाहता था. तो िफर हमने उस आदमी को ढूंढ़ने की कायवाही शु की normally जैसे हम हर एक के स म ही करते ह. हमने 3 teams बनायीं, और उस इलाके को अे से छानना शु िकया. और थोड़ी देर बाद ही हमारे एक साथी को वो राा िमल गया िजस पर वो आदमी गया था. िफर ा था. हमने उसी राे का पीछा करना शु कर िदया. अचानक मेरे radio -phone(walkie-talkie) पर एक साथी की call आयी और उसने हम पीछे आने को कहा. आमतौर पर ऐसी कॉल आने का एक ही मतलब होता है की या तो खोया आ शस िमल गया है या उसकी बॉडी रकवर की गयी है. तो हम सब उस जगह पंचे जहाँ हम हमारे साथी ने बुलाया था. वहां पंचे तो देखा की हमारा साथी एक पेड़ के नीचे खड़ा था और ऊपर देख रहा था, उसके दोनों हाथ उसके सर पर थे. मने दूर से ही उसको आवाज़ लगाई तो उसने पेड़ के ऊपर हाथ करके इशारा िकया. मने ऊपर देखा तो एक बार के िलए मुझे यकीन ही नहीं आ अपनी आँखों पर. पेड़ के करीब 30 फ़ीट ऊपर टहनी पर एक छड़ी (walking stick) लटकी ई थी. उस छड़ी के ऊपर का िहा िजसको की हाथ म पकड़ा जाता है वो अे से टहनी म टंगा आ था और वो छड़ी झूल रही थी. ऐसा हो ही नहीं सकता था की उस खोये ए बूढ़े शस ने उस छड़ी को 30 फ़ीट ऊपर उछाल कर वहां टांग िदया हो. और ना ही हम वहां उस आदमी के आने का कोई िनशान िमला. हम काफी देर वही खड़े उस झूलती ई छड़ी को ही देखते रहे. हमने बत देर तक उस इलाके को छाना लेिकन उसका कोई सुराग नहीं िमला, यहाँ तक की खोजी कु ो (dog squad) को भी काम पर लगाया. लेिकन वो कु े भी उस पेड़ के नीचे पंचते ही उसकी गंध खो देते थे. कु छ िदन बाद हार कर हमने वो के स बंद िकया ुकी हम और भी cases पर काम करना होता था. और उससे ादा हम कर भी ा सकते थे. उसकी wife हमको महीनो तक daily कॉल करके पूछती की उसका husband िमला ा, और हर बार उसकी उीदों का टूटना बत िदल तोड़ने वाला था. मुझे नहीं पता की इस एक के स ने ही मेरा िदल इतना ों तोडा. शायद इसिलए की उसके िमलने के chances सबसे कम थे. या िफर इसिलए की हम इतना बड़ा clue िमलने के बाद भी हम उस शस को ढूंढ नहीं पाए. आखर वो आदमी उस पेड़ तक कै से पंचा ? ा िकसी ने उसका क़ करके उसकी छड़ी को वहां टांग िदया था हमको challange करने के िलए ? हमने बत कोिशश करी उसको ढूंढ़ने की, लेिकन नहीं ढूंढ पाए. ऐसा लगा िकसी ने हमको challenge िकया की ढूंढ के िदखाओ और हम उस challenge म फे ल हो गए.
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खोये ए बों को ढूंढ़ने का काम सबसे ादा िदल तोड़ने वाला होता है. बे चाहे िकसी भी हालात म खोये हो उनको ढूंढ़ना हमेशा मुल ही होता है. और हमेशा, हमेशा ही जब भी िकसी खोये ए बे का के स आता है हम दुआ करते ह की बा सही सलामत िमल जाये. हमेशा तो नहीं लेिकन कु छ के सेस म dead bodies ही रकवर होती ह. एक बार की बात क तो एक बार हमारे पास एक के स आया. एक lady अपने तीन बो के साथ िपकिनक मनाने गयी थी एक बड़े park म, नदी िकनारे. सबसे बड़े बे की उ करीब 6 साल, दूसरे की 5 साल और तीसरे की करीब 3 साल रही होगी. तीनो बे उसकी आँखों के सामने ही खेल रहे थे, और उसने बताया की उसने एक सेकं ड के िलए भी बो को अपनी नजरो के सामने से जाने नहीं िदया. और गौर करने वाली बात है की उसने िकसी दूसरे इंसान को भी वहां आस पास नहीं देखा. मौज मी करने के बाद वो लोग वािपस अपना सामान बाँध के पािक ग एरया म जाने लगे जहाँ उनकी कार खड़ी थी. वो नदी बत ादा बड़ी नहीं थी, जंगलो के बीच म कोई 3-4 िकलोमीटर ली रही होगी और उसके साथ का राा भी िबलकु ल साफ़ था, घने जगल थे,लेिकन नदी िकनारे का राा साफ़ था. और पािक ग एरया का राा नदी िकनारे सी ही जाता था. और ये िबलकु ल impossible ही था की कोई उस राे से भटक जाये. तीनो बे अपनी माँ के साथ जा ही रहे थे, तीनो बे आगे आगे थे और उनकी मी सबसे पीछे थी उनपर नजर रखे ए. अचानक माँ को ऐसा लगा की उसके पीछे कोई है और उसने पीछे मुड़ के देखा. इी िसफ 3-4 सेक्स म ही 5 साल वाला बा गायब हो गया. पहले माँ को लगा की शायद बा सुसु करने के िलए इधर उधर हो गया है. िफर उसने दूसरे बो से पूछा तो उोंने बताया की एक बड़ा सा डरावने मुँह का आदमी जंगल म से आया और उसका हाथ पकड़ के उसको अपने साथ ले गया. दोनों बे िबलकु ल डरे नहीं ए थे. उस lady ने हम बताया की ऐसा लग रहा था की मानो दोनों बे नशे म हो. जािहर है वो lady बत डर गयी थी और बदहवास सी होके बे को ढूंढ़ने लगी. वो बे का नाम लेके जोर जोर से िचा रही थी, उसने बताया की एक बार तो उसको ऐसा लगा की बे ने वािपस उसको आवाज़ दी हो. अब जािहर है वो अके ली lady अके ले तो घने जंगल म नहीं जा सकती थी उसको ढूंढ़ने के िलए, उसके साथ दो बेऔर भी थे. तो उसने पुिलस को कॉल िकया, और पुिलस ने तुरंत हम फ़ोन िकया. हमारे पास के स आते ही हम जी से उस जगह पंचे और बे को ढूंढ़ना शु िकया. हमारे साथ हमारा dog squad भी था. करीब 3-4 िकलोमीटर ढूंढ़ने की बाद भी हम बा का एक िनशान तक नहीं िमला. ना ही dog squad को बे की कोई गंध िमली. न पैरो के िनशान, न टूटी टहिनयां, ना कोई कपडा ना ही और कु छ. ऐसा कोई िनशान नहीं िमला िजससे ये सािबत हो सके के वो बा वहां था भी. कु छ देर के िलए शक माँ पर भी गया लेिकन उसकी हालत देख के जािहर था की वो खुद इतनी टूट गयी थी की उस पर शक करना बेकार था. हमने volunteers की मदद से करीब एक हा उस इलाके को ढूंढा, लेिकन कु छ हाथ नहीं लगा. आखर म हमने ढूंढ़ना बंद िकया, लेिकन volunteers ने अपनी खोज जारी राखी. और एक िदन हम रेिडयो-फ़ोन पर call आयी की एक बॉडी िमली है और रकवर करने की जरत है. उोंने जब हम लोके शन बताई तो हम यकीन नहीं आ. बे की बॉडी उसके गायब होने की जगह से करीब 20 िकलोमीटर दूर िमली थी. पहले तो हम लगा की ये िकसी और बे की बॉडी है. लेिकन वहां पंचने पर जब िशना की तो पता चला की ये वो ही बा था. िकसी को समझ नहीं आया की बा इतनी दूर कै से पंचा. वो जगह इतनी दूर थी की वहां िकसी ने ढूंढा ही नहीं. वो तो बस एक volunteer ने सोचा की वो ऐसी जगह ढूंढे जहाँ कोई नहीं ढूंढ रहा है और हो सकता है बॉडी को वहां िठकाने लगा िदया गया हो. वो एक छोटी पहाड़ी की नीचे ही ढूंढ रहा था की उसकी नजर ऊपर पड़ी िकसी चीज पर पंची, उसने अपने binoculars से देखा तो समझ गया की ये तो उसी बे की बॉडी है िजसको वो ढूंढ रहा है. Body को पहाड़ी पर बने एक छोटे से छेद म ढूंसा गया था. उसको बे की shirt का color याद था इसिलए देखते ही उसको पता चल गया की ये वो ही बा है. तब उसने हमको रेिडयो पर कॉल िकया और हम वहां पंचे. हम उसकी बॉडी को िनकालने म 1 घंटा लग गया था. ना िसफ वो बा अपनी जगह से 20 िकलोमीटर दूर िमला, ब उसकी body ऐसी जगह पर थी जहाँ पंचना बत ही मुल था. और कोई बा तो वहां अके ला पंच ही नहीं सकता था. पहाड़ी की ढलान पर बने छोटे से छेद म उसकी बॉडी ऐसे ढूंसी ई थी मानो िकसी ने जबरदी ढूंसी हो. हम हमारे पूरे gear के साथ भी उस जगह पंचने म बत मशत करनी पड़ी थी. और िसफ इतना ही नहीं, उसकी बॉडी पर चोट का या िकसी खरोंच का एक िनशान तक नहीं था. उसके पैरो म जूते भी नहीं थे, लेिकन िफर भी पैरो म जरा से भी मी नहीं लगी थी. तो ऐसा भी नहीं हो सकता था की उसको कोई जंगली जानवर वहां खींच के लाया हो. और उसकी लाश को देखके ऐसा लग ही नहीं रहा था की ये बा 30 िदन पहले मर चुका है. उसकी बॉडी हमको उसके खोने के 30 िदन बाद िमली थी लेिकन उसको देखके लग रहा था की लाश ादा से ादा एक या दो िदन पुरानी है. सारी चीज िदमाग घुमाने वाली थी. पो माटम के बाद पता चला की बे की मौत ठ लगने से ई थी. बा ठ म जम गया था. समझ नहीं आया ये सब कै से आ. इतने सारे सवाल िजनका आज तक कोई जवाब नहीं िमल पाया है.
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मेरा अगली सच्ची कहानी होगी भूतिया मकान  

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