सभी ग्राम रोजगार सेवक से आचार्य ज्ञान प्रकाश जी का अपील

सभी ग्राम रोजगार सेवक से आचार्य ज्ञान प्रकाश जी का अपील

सम्मानित ग्राम रोजगार सेवक साथियों एंव शोषित संविदा कर्मी साथियों,
सादर अभिवादन:-
साथियों, जैसा कि आप सभी पूर्व से अवगत है कि वर्तमान भारतीय जनता पार्टी सरकार के मा0 प्रधानमंत्री जी, भारत सरकार एवं मा0 मुख्यमंत्री जी, उ0प्र0 सरकार संविदा शोषित संवर्गो को लेकर कितना उदासीन है। राज्य सरकार व केन्द्र सरकार द्वारा मंचो के माध्यम से कहा जाता रहा है

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इत्यादि – इत्यादि

साथियों, क्या 1000-1500 रु0 से लेकर 6000-7000 रु0 के बीच मे 12-15 वर्षो से लगातार काम कर रहे संविदाकर्मी (ग्राम रोजगार सेवक) जो ग्राम पंचायत के विकास सम्बन्धी सभी कार्यों को धरातल पर उतारने का प्रमुख कार्य करते है। आशा बहुएँ, आंगनवाड़ी, समस्त मनरेगाकर्मी, शिक्षा-मित्र, प्रेरक एवं अन्य समस्त विभागीय संविदा शोषित संवर्गो के लोग जो कड़ी मेहनत करते हुए केन्द्र व राज्य सरकार के द्वारा संचालित सभी योजनाओं का लाभ जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे है, आखिर इस कार्य के बदले उन कर्मियों को क्या मिल रहा है।
1000-1500रु0 से लेकर 6000-7000रु0 मानदेय के रूप में मिले धनराशि से जीविकोपार्जन करना है, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई करानी है, घर मे बुजुर्ग माता-पिता का दवा करानी है, साथ ही साथ परिवार का भरण-पोषण कराना है,
क्या ये न्यायसंगत है?
क्या ये सबका साथ-सबका विकास है?
क्या यही उ0प्र0 बदल रहा है?
साथियों ऐसे दो-राही मोड़ पर ला करके युवावस्था में 18 से 25 वर्ष के बीच मे संविदा जैसी कोढ़ से जोड़ने के बाद आज लगभग सत्तर प्रतिशत लोग 40 वर्ष की उम्र सीमा को लांघ गए है, जो न अब घर के ही रहे न घाट के ही रहे। ऐसे में अगर आत्महत्या करता है तो परिवार उसका पीछे छूट जाएगा, और समाज के लिए कायरता साबित होगी। इस जिल्लत भरी जिन्दगी से संविदाकर्मी थक चुका है।
साथियों, क्या मा0 प्रधानमंत्री जी, मा0 मुख्यमंत्री जी सहित अन्य किसी राजनैतिक दल के पास इसका जबाब है कि संविदा शोषित संवर्गों के लोगों के साथ न्याय होना चाहिए। आज तक के इतिहास में क्या किसी राजनैतिक दल ने इनकी वेदना को समझने की कोशिश की? सभी संविदा शोषित संवर्गों के लोगों को राजनीतिक सभी पार्टियों का बहिष्कार करना चाहिए और आने वाले आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव में सर्वप्रथम भारतीय जनता पार्टी की सरकार को दिखानी चाहिए कि हर ग्राम पंचायत में 15 से 20 की संख्या में संविदाकर्मी है जो सरकार बनाने-बिगाड़ने में भूमिका निभा सकते है।
साथियों, सरकार अपने ही हाथों अपनी पीठ थपथपा रही है कि देशहित में भारतीय जनता पार्टी एक से बढ़कर एक कार्य कर रही है।
देश के नौजवानों के साथ व मेधावियों के साथ जो अन्याय कर रही है…..
क्या यही न्यायसंगत है?
क्या यही सबका साथ-सबका विकास है?
क्या यह देशहित में है?
क्या यह देश के बदलाव का कोई स्वरूप है?

मा0 मुख्यमंत्री जी अगर आपके पास तनिक भी शर्मोहया है तो ऊचित जबाब के साथ मेरा इस्तीफा स्वीकार करें।
एक स्वतंत्र नागरिक होने के नाते मतदाता के रूप में 2019 के लोकसभा चुनाव में आपसे मुलाकात होगी, ये आप भी जानते है कि चोट खाया हुआ शेर कितना खूंखार होता है।

(आचार्य ज्ञान प्रकाश)

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