आईए जानते हैं भूगोल के बारे में I know about geography

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                               आईए जानते हैं भूगोल के बारे में I know about                                                                                   geography

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सामान्य अध्ययन की तैयारी की रणनीति के तहत विगत अंकों में हमने इतिहास, कला संस्कृति, भारतीय राजव्यवस्था व शासन के खंडों की तैयारी की रणनीति एवं अन्य पहलुओं पर चर्चा की थी। इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए इस अंक में हम भारत एवं विश्व के भूगोल की तैयारी की रणनीति एवं अन्य पहलुओं पर चर्चा करेंगे।

भूगोल विषय से पूछे जाने वाले प्रश्नों को अभ्यर्थी प्राय: कठिन मानते हैं। सामान्यत: भूगोल विषय को 3 भागों में बांटा जा सकता है।
1.सामान्य भूगोल 2. भौतिक भूगोल 3. आर्थिक भूगोल

सामान्य भूगोल के तहत ब्रह्मांड की उत्पत्ति के सिद्धांत, सौरमंडल, पृथ्वी की गतियां, अक्षांश, देशांतर इत्यादि अध्यायों को रखा जाता है। इस खंड से धारणात्मक व तथ्यात्मक दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं। धारणात्मक प्रश्नों की तैयारी स्तरीय एवं प्रामाणिक पुस्तकों द्वारा अवधारणात्मक समझ विकसित करके की जा सकती है।

तथ्यात्मक प्रश्नों हेतु सौरमंडल का मानचित्र के साथ अध्ययन करके तैयार किया जा सकता है। सौरमंडल का मानचित्र प्राय: मानचित्र की प्रत्येक पुस्तक में दिया होता है। भौतिक भूगोल से पूछे जाने वाले प्रश्नों का दायरा ज्यादा व्यापक होता है। और सामान्य भूगोल की अपेक्षा ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं। इस खंड में स्थलमंडल, पृथ्वी की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखी, भूकंप, सुनामी, चक्रवात व प्रति चक्रवात, जलमंडल, महासागरीय धाराएं व लवणता, वायुमंडल, दाब, जलवायु प्रदेश इत्यादि से प्रश्न पूछे जाते हैं।

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इस खंड से भी अवधारणात्मक समझ व तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। अवधारणात्मक प्रश्नों को स्तरीय पुस्तकों को अध्ययन करके किया जा सकता है, जैसे-ज्वालामुखी बनने का कारण, ज्वालामुखी विस्फोट का कारण, ज्वालामुखी उद्गार, भूकम्प, महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति का कारण जैसे अवधारणात्मक प्रश्नों को अध्ययन करके अवधारणात्मक समझ द्वारा किया जा सकता है, परन्तु यदि विश्व में ज्वालामुखी के वितरण, महासागरीय धाराओं की प्रकृति के बारे में प्रश्न पूछा जाए तो प्रथम दृष्ट्या ये प्रश्न तथ्यात्मक लगते हैं। परन्तु ये प्रश्न भी मानचित्रों के अध्ययन तथा बार-बार मानचित्रों को देखने मात्र से आसानी से किये जा सकते हैं।

इसके लिए भूगोल का अध्ययन करते समय उस अध्याय से संबंधित मानचित्र को अवश्य देखें तथा बारंबार ऐसा करने से भूगोल के प्रश्न भी सर्वथा आसान प्रतीत होने लगेंगे।

साथ ही साथ कट एंड ड्रॉ नामक रिक्त मानचित्र पुस्तिका, जो बाजारों में उपलब्ध है, को अवश्य भरें। पहले स्थलमंडली पर जो आकृतियां हैं, जैसे-पर्वत, पठार, ज्वालामुखी पर्वत, नदियां, झीलें इत्यादि को प्रत्येक महाद्वीप के अनुसार अलग-अलग भरें। भारत के भौतिक भूगोल हेतु भी यही प्रक्रिया अपनाई जाने की आवश्यकता है। भारतीय अपवाह तंत्र को उत्तर भारत, प्रायद्वीपीय भारत व दक्षिण भारत में बांट कर अध्ययन करें। भारत के भूगोल हेतु अरविंद पेरियार की भारत का भूगोल नामक पुस्तक का अध्ययन करें तथा इस पुस्तक के मानचित्रों पर अवश्य ध्यान दें।

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विगत कुछ वर्षों में आर्थिक भूगोल से अपेक्षाकृत ज्यादा प्रश्न पूछे जाने की प्रवृत्ति दिखाई देती है। इस खंड में विश्व एवं भारत के आर्थिक भूगोल से प्रश्न पूछे जायेंगे। इस खंड में कृषि एवं पशुपालन, खनिज संसाधन, परिवहन, उद्योग, जनसंख्या एवं नगरीकरण तथा बहुउद्देशीय परियोजनाओं जैसे अध्यायों को समावेशित किया जा सकता है।

इस खंड से भी पूछे जाने वाले प्रश्नों को स्तरीय पुस्तकों का अध्ययन व मानचित्रों का अध्ययन करके किया जा सकता है। कृषि, पशुपालन व मत्स्यन जैसे अध्यायों को विश्व व भारत के जलवायु प्रदेशों से अंतरसंबंध स्थापित करके भी आसानी से समझा जा सकता है।

अंतत: मैं यह कहना चाहूंगा कि सम्पूर्ण भूगोल का अध्ययन अवधारणात्मक समझ के आधार पर किया जाना चाहिए तथा प्रत्येक खंड/अध्याय का अध्ययन मानचित्र आधारित अवश्य होना चाहिए, क्योंकि मानचित्र भूगोल के लिए प्राणवायु का कार्य करता है और तथाकथित तथ्यात्मक प्रश्नों को हल करने का अचूक अस्त्र है।

    THE BBM NEWS           धन्यवाद मित्रो    THE BBM NEWS

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