बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र से होगा त्रिकोणीय मुकाबला द बीबीएम न्यूज़

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सीनियर चीफ रिपोर्टर उत्तर प्रदेश की रिपोर्ट-दिलीप कुमार,

बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र,इस बार लोकसभा चुनाव में दिलचस्प जंग का गवाह बन गया है. ।।

यहां अपने—अपने समीकरण साधने में जुटे प्रत्याशियों की नजर खामोश खड़े मुस्लिम मतदाताओं पर टिक गयी है।।

. समाजवाद के प्रणेताओं में शुमार किये जाने वाले रामसेवक यादव की कर्मभूमि बाराबंकी में वर्ष 1957 से लेकर ज्यादातर वक्त तक समाजवादियों का ही दबदबा रहा।।

इस सीट पर आम चुनाव और उपचुनावों के कुल 17 मौकों में से सिर्फ पांच बार कांग्रेस, दो बार भाजपा और एक बार बसपा के प्रत्याशी जीते हैं।।

बाकी मौकों पर समाजवादी विचारधारा के जनप्रतिनिधियों ने ही यहां कब्जा किया है।।

. बाराबंकी, जैदपुर, रामनगर, हैदरगढ़ और कुर्सी विधानसभा सीटों को खुद में समेटे इस सुरक्षित श्रेणी की सीट पर सपा—बसपा गठबंधन ने चार बार सांसद रह चुके राम सागर रावत को मैदान में उतारा है।।

कांग्रेस ने अपने पूर्व सांसद पी.एल. पुनिया के बेटे तनुज पुनिया पर दांव लगाया है. भाजपा ने जैदपुर सीट से मौजूदा विधायक उपेन्द्र रावत को उम्मीदवार बनाया है।।

करीब 18 लाख मतदाताओं वाले इस लोकसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण खासा अहम है लेकिन जीत—हार का दारोमदार करीब 25 प्रतिशत आबादी वाले मुस्लिम मतदाताओं पर रहता है।।

अब तक मुसलमानों का समर्थन ही किसी भी प्रत्याशी का भाग्य तय करता रहा है. वरिष्ठ पत्रकार हशमत उल्ला कहते हैं कि इस दफा यहां त्रिकोणीय मुकाबला है।।

मगर मुस्लिम वोट जिधर जाएगा, वही जीतेगा. अगर यह बंट गया तो भाजपा को फायदा होगा. हालांकि मुसलमान मतदाता बिल्कुल खामोश हैं और वे यह जाहिर नहीं होने दे रहे कि उनका रुझान किस तरफ है।।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में बाराबंकी से सांसद रहे पुनिया को अपने कार्यकाल में क्षेत्र में किये गये विकास कार्यों का फायदा मिल सकता है लेकिन गठबंधन प्रत्याशी राम सागर को भी कम नहीं आंका जा सकता। गठजोड़ के बाद उन्हें बसपा फायदा मिल सकता है।

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