आँखों देखी :- डॉ० क़य्यूम नें कर्त्तव्य का निर्वाहन कर मानव धर्म निभाया।बच्चे के गले में फंसी बारीक खर निकाल कर लोगों को हैरत ज़दा किया।

आँखों देखी :- डॉ० क़य्यूम नें कर्त्तव्य का निर्वाहन कर मानव धर्म निभाया।बच्चे के गले में फंसी बारीक खर निकाल कर लोगों को हैरत ज़दा किया।

आँखों देखी :- डॉ० क़य्यूम नें कर्त्तव्य का निर्वाहन कर मानव धर्म निभाया।बच्चे के गले में फंसी बारीक खर निकाल कर लोगों को हैरत ज़दा किया। Aankhen saw: – Dr. Qayyum performed the human religion by performing the duty. He surprised the people by removing the fine hair stuck in the neck of the child.

बलरामपुर :- डॉक्टर अब्दुल क़य्यूम नें दर्द से तड़पते मासूम बच्चे को तकलीफ़ से निजात दिलाई।माँ नें कहा डॉक्टर साहब भगवान का रूप हैं।
जनपद गोण्डा के महराजगंज,जय प्रभा ग्राम,जमुनाही हरदेव पट्टी निवासी भगीरथ वर्मा अपने तीन वर्षीय पुत्र छोटू को दर्द से तड़पता और रोता बिलखता हुआ लेकर ईएनटी सेण्टर बलरामपुर पहुंचे जहाँ बच्चे की माँ डॉक्टर अब्दुल क़य्यूम के सामने हाथ जोड़ कर बिलखते हुए अपने बच्चे को बचा लेनें की गोहार करनें लगी।मरीज़ों के बीच घिरे डॉक्टर साहब तुरंत अपनी कुर्सी से उठ कर उस माँ के पास आए और उन्हें संतावना देते हुए कहा आप परेशान ना हों बताएं आप के बच्चे को क्या हुआ है उस माँ नें बताया कि मेरा बच्चा ना तो कुछ खा रहा है और ना ही कुछ पी रहा है बस रोता रहता है।इतना सुनते ही श्री क़य्यूम बच्चे को लेकर आईसीयू में चले गए।
हैरत उस वक़्त हुई जब सिर्फ़ कुछ मिनटों बाद डॉक्टर बच्चे को हस्ता हुआ अपनी गोद में लेकर आए और बच्चे को माँ की गोद में देकर कहा देखो तुम्हारा बच्चा बिल्कुल स्वस्थ्य है अब परेशान मत हो।माँ नें अपनी गोद में हस्ते हुए अपने मासूम बच्चे का माथा चूम कर डॉक्टर साहब की तरफ़ देखते हुए कहा ” डॉक्टर साहब आप हमरे लिए भगवान हो ” और यह कहते हुए उसकी आँख में आँसू आ गए।डॉक्टर क़य्यूम नें उस माँ को संतावना देते हुए कहा कि मैं कोई भगवान नहीं बस आप सब का सेवक हुँ मेरे लिए आप दुआ करें और आशिर्वाद दें।
डॉक्टर अब्दुल क़य्यूम कुछ देर के बाद राहत की सांस लेते हुए अपनी कुर्सी पर बैठ गए और सामनें रक्खी किसी चीज़ को देखनें लगे।जब मैंने उनसे पूछा डॉक्टर साहब क्या हुआ था बच्चे को ? तब उन्हों नें बताया कि बच्चे की हलक़ में एक बाल की तरह बारीक सी धारदार खर फंसी हुई थी यह तो शुक्र है कि बच्चा समय से आ गया अगर कहीं यह खर सांस की नली में फंस जाती तो ना तो बच्चा सांस ले पाता और ना ही कुछ खा पी पाता जिस्से बच्चे के साथ कोई भी दुर्घटना हो सकती थी। उस बारीक सी खर को देख कर मैं भी हैरत में था और जितनें मरीज़ और तिमारदार थे वह भी देख कर हैरत ज़दा थे।
पोस्ट लिखने का असल मक़सद यह है कि आज कल जिस तरह मेडिकल लाइन में मानवता ख़त्म सी होती जा रही है चिकित्सकों के द्वारा मरीज़ों और तिमारदारों के प्रति दुर्व्यवहार की खबरें आम सी हो गई हैं अपनें व्यक्तिगत लाभ के लिए इस प्रोफेशन में मरीज़ों के शोषण और कमीशन खोरी का वर्चस्व है ऎसे समय में अपने पेशे के प्रति वफ़ादारी करते हुए मानवता धर्म निभानें वाले समाजसेवी रूपी डॉक्टरों की हौसला अफ़ज़ाई ज़रूर होनी चाहिए। अपने प्रोफेशन के प्रति कर्तव्यों का निर्वाहन करनें वाले, मानवता धर्म को निभाते हुए मरीज़ों का दर्द समझनें वाले समाजसेवी रूपी सभी चिकित्सकों को मेरा सलाम।

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तहसील कोऑर्डिनेटर अनिल शर्मा

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