आज एक पत्थर उछला है उम्मीद का ।सालो बाद उम्मीद जागी है । शब्बास वेदांत उम्मीद जगाने के लिए ।

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आज एक पत्थर उछला है उम्मीद का ।सालो बाद उम्मीद जागी है । शब्बास वेदांत उम्मीद जगाने के लिए ।Today a stone has sprung of hope. After years, there is hope. Shabbas Vedanta to arouse hope.


हुआ यूं कि दो दिन पहले प्रीकॉन्को कॉलोनी इंदौर में एक महिला के गले से एक बदमाश ने चेन खींची ,महिला के विरोध करने पर सफल न होते देख ,बदमाश ने महिला को नीचे गिराकर पेपर कटर जैसे तेज धार वाले हथियार से हमला बोल दिया ।महिला की पुकार सुन 10 कक्षा का छात्र वेदांत तिवारी उम्र 16 साल ने बहादुरी का परिचय देते ,एक पत्थर उठा कर बदमाश को मारा ,पत्थर लगते ही बदमाश डर के भागने लगा तब आसपास के दुकानदार बाइक सवार ने उसे पकड़ा ।
बहुत से लोग घटना देख रहे थे किंतु वेदांत ने महिला की मदद के लिए पहला पत्थर फेंक हमारी उम्मीदे जगा दी है ।
शब्बास वेदांत तुम्हारी पहल न जाने कितने वेदांत की प्रेरणा बनेगी ।


तुम्हारी पहल शुभ संकेत है ,सामाजिक बदलाव का जिस बदलाव की हमे जरूरत है ।कोई भी बेटी ,बहन ,माँ तुम्हारे जैसो के होते असुरक्षित नही है ।
फिर से शब्बास मेरे नन्हे दोस्त ।
धैर्यशील येवले
पुलिस निरीक्षक इंदौर ।

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