कोरोना वायरस का ज्योतिषीय विश्लेषण एव सावधानीयाँ

कोरोना वायरस का ज्योतिषीय विश्लेषण एव सावधानीयाँ

प्रत्येक सत्ताईस वर्ष मे सूर्य की एक परिक्रमा करके जब शनि ग्रह उत्तराषाढ़ नक्षत्र क्षेत्र में आता है, तो एक प्रकार का विषाणु शनि ग्रह से पृथ्वी पर आता है।जो महामारी फैलाता है ।तथा जैव विज्ञानिक इस वायरस को गुण एवं स्वभाव के अनुसार एक नया नाम देते है।इस वार यह वायरस कोरोना वायरस के रुप मे पृथ्वी पर उपस्थित है।
कैरोना वायरस 25/12/2019 को शनि ग्रह से यात्रा करते हुये 10/01/2020 को धरती पर आया । और यह वायरस 25 ° अक्षांश से 35 ° अक्षांश के वीच आने वाले स्थान (देश) तथा ऊंचे स्थानो पर उच्च तीव्रता से महामारी फैलाता है। और अन्य स्थानों (देशो)पर इसका मामूली प्रभाव पढ़ता है। तथा भूमध्यरेखा के आस पास इसका प्रभाव न के वरावर होगा
वैज्ञानिक ज्योतिष के अनुसार इस वायरस का असर 25/05/2020 तक रहेगा और बाद में यह धीरे-धीरे घटता और 20/07/2020 से पहले समाप्त हो जावेगा।
पूरे भारत में द्वादस ज्योतिर्लिंगों की उपस्थिति के कारण भारतीय भूमि इस वायरस से बचने के लिए सबसे सुरक्षित जगह है।अर्थात ज्योतिर्लिंग क्षेत्रो मे इस वायरस का प्रकोप न के वरावर होगा।।
वैसे तो सभी लोगो के लिये इससे बचाव के उपाय तथा सावधानी वर्तनी चाहिये। परन्तु
मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ मृगशिरा, आद्रा और पुनर्वसु नक्षत्र मे जन्म लेने वाले लोगों (जातक)को इस वायरस से बचाव के लिये विशेष सावधानी वर्तनी चाहिए।
स्वच्छता का विशेष ख्याल रखना चाहिये। इस वायरस से बचाव हेतू आयुष विभाग तथा शासन द्वारा दिये गये निर्देशो का अक्षरसः पालन करना चाहिये।।
तुलसी पत्र , लौंग ,सौंठ , अदरक, पीपर इत्यदि का काड़ा वनाकर प्रतिदिन पीना चाहिये।
गर्म जल का प्रयोग (पीने तथा नहाने मे )करना चाहिये।

✍आचार्य कृष्णकांत पाठक
ज्योतिषाचार्य
माँ सरस्वती ज्योतिष शोध संस्थान
आरौन (म० प्र०)473101

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